हिंगलाज से कपडवंज तक
माँ हिंगलाज के मूल शक्तिपीठ, शोभना माँ की यात्रा और श्री हिंगलाज धाम के निर्माण की कथा।
माँ हिंगलाज और मूल शक्तिपीठ
हिंगलाज माता का मूल मंदिर पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में, हिंगोल नदी के पास एक गुफा में है। परंपरा के अनुसार यहाँ सती के मस्तक का भाग गिरा था, इसलिए यह स्थान 51 शक्तिपीठों में विशेष माना जाता है।
हर साल अप्रैल में वहाँ हिंगलाज यात्रा होती है और लाखों भक्त दर्शन के लिए आते हैं। लेकिन भारत के भक्तों के लिए वहाँ जाना बहुत कठिन है। कई समाज माँ हिंगलाज को कुलदेवी के रूप में पूजते हैं।
शोभना माँ की यात्रा
अहमदाबाद के माई भक्त मफतलाल महाराज के आशीर्वाद से शोभना माँ ने संत जीवन अपनाया। 22 अक्टूबर 2010 को वे 11 माई भक्तों के साथ पाकिस्तान के हिंगलाज धाम की यात्रा पर गईं।
वहाँ के दर्शन और भक्ति भाव से उन्होंने संकल्प लिया कि माँ का ऐसा ही धाम गुजरात में बने, ताकि यहाँ के भक्त भी माँ के दर्शन का लाभ ले सकें।


धाम का निर्माण
कई स्थान देखने के बाद कपडवंज के पास वात्रक नदी के तट पर, उत्कंठेश्वर महादेव और केदारेश्वर महादेव जैसे प्राचीन धामों के पास माँ का स्थान तय हुआ।
2015 में शिलान्यास हुआ। मूल हिंगलाज की तरह धाम गुफा स्वरूप में बनाया गया है: मंदिर एक टीले पर है और माँ के दर्शन भूमिगत गुफा में होते हैं।


प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव
फाल्गुन शुक्ल प्रतिपदा से तृतीया (16 से 18 फरवरी 2018) तक आचार्य रितेशभाई रावल के मार्गदर्शन में तीन दिन का प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव हुआ। तब से हर साल फाल्गुन शुक्ल तृतीया को पाटोत्सव मनाया जाता है।
- पहला दिन (16 फरवरी): गाँव में नगर यात्रा, मंडप प्रवेश और अग्नि स्थापन।
- दूसरा दिन (17 फरवरी): 1008 कलश से माँ का महा अभिषेक और अधिवास विधि।
- तीसरा दिन (18 फरवरी): वेदोक्त मंत्रों के साथ निज मंदिर में माँ हिंगलाज की प्रतिष्ठा।
अखंड ज्योत और हिंगलाज का प्रसाद
बलूचिस्तान के मूल हिंगलाज धाम से माँ की अखंड ज्योत यहाँ लाई गई है। साथ ही वहाँ से प्रसाद के रूप में ठूमरो और यंत्र भी लाए गए, जो गुफा में स्थापित हैं। धाम में पंचधातु का श्रीयंत्र भी विराजमान है।
आज धाम में
धाम में नित्य पूजा और आरती शोभना माँ और पुजारी जतीन महाराज करते हैं। धाम द्वारा गौशाला और आश्रम भी चलाए जाते हैं।
धाम में विराजमान देवी-देवता
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